भिंड। कारगिल युद्ध को 27 साल बीत चुके हैं, लेकिन भिंड निवासी कैप्टन बादशाह खान के लिए उस जंग की यादें आज भी ताजा हैं। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान जुवैर हिल पर कब्जे की लड़ाई लड़ी थी। उनके मुताबिक यह अभियान बेहद कठिन था और हर कदम पर जवानों को जिंदगी और मौत के बीच फैसला लेना पड़ रहा था।
80 जवानों ने शुरू की चढ़ाई
कैप्टन बादशाह खान बताते हैं कि उस समय वह 22 ग्रेनेडियर्स में तैनात थे। तत्कालीन लेफ्टिनेंट कर्नल अजीत सिंह के नेतृत्व में चार्ली एचएमसी कंपनी को जुवैर हिल पोस्ट पर कब्जा करने का लक्ष्य मिला था। करीब 80 जवानों ने शाम 5 बजे चढ़ाई शुरू की।
बर्फीली पहाड़ी पर मुश्किल सफर
करीब 5.5 हजार फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ी पर चढ़ना बेहद मुश्किल था। कई जगह जवानों को रस्सियों के सहारे ऊपर जाना पड़ा। कड़ाके की ठंड के कारण पैरों की हालत खराब हो रही थी, लेकिन जवान लगातार आगे बढ़ते रहे।
12 घंटे तक जारी रही चढ़ाई
जवान करीब 12 घंटे तक लगातार चढ़ते रहे। इस दौरान पाकिस्तानी सैनिक चोटी से स्नाइपर फायर कर रहे थे। गोलियां जवानों के आसपास से गुजर रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उनका हौसला कमजोर नहीं हुआ।
40 जवान ही पहुंच सके चोटी तक
कैप्टन बादशाह खान के मुताबिक, 80 जवानों में से सिर्फ 40 ही चोटी तक पहुंच सके। बाकी जवान कठिन परिस्थितियों और दुर्गम रास्ते के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। चोटी तक पहुंचने वाले जवानों का मकसद स्पष्ट था—जुवैर हिल पर कब्जा करना और वहां तिरंगा फहराना।









