नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का आंतरिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। गुरुवार को पार्टी के बागी गुट का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग पहुंचा और मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर खुद को टीएमसी का वास्तविक संगठन बताते हुए नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को मान्यता देने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने की। चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि बागी गुट ने अपना पक्ष विस्तार से रखा है और आयोग ने उनकी बात गंभीरता से सुनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग जल्द ही इस मामले में उचित निर्णय लेगा।
दरअसल, 22 जून को कोलकाता में आयोजित प्रतिनिधि बैठक में बागी गुट ने संगठन में बड़े बदलाव करते हुए नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एनडब्ल्यूसी) का गठन किया था। अब इसी नई कार्यकारिणी को आधिकारिक मान्यता दिलाने की मांग चुनाव आयोग के समक्ष रखी गई है।
टीएमसी में यह राजनीतिक संकट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद शुरू हुआ। 3 जून को पार्टी के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए। इसके बाद 15 जून को पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने भी टीएमसी छोड़कर त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (एनसीपीआई) में शामिल होने का फैसला किया। इन घटनाओं के बाद पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है।









