90 के दशक में मुंबई की एक सड़क पर सैफ अली खान अपनी पार्टनर और एक दोस्त के साथ कार में जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रही एक दूसरी कार के ड्राइवर ने अचानक गलत मोड़ ले लिया।
इस पर सैफ ने गुस्से में इशारा किया। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों गाड़ियों में सवार लोग सड़क पर उतर आए। देखते ही देखते विवाद हाथापाई में बदल गया।
लड़ाई के बाद अचानक हंसने लगे दोनों
बताया जाता है कि झगड़े के दौरान दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई और गुस्से में एक-दूसरे को काट भी लिया। लेकिन कुछ ही देर बाद माहौल पूरी तरह बदल गया।
दोनों अचानक हंसने लगे और एक-दूसरे को गले लगा लिया। कुछ देर पहले तक सड़क पर भिड़ रहे दोनों लोगों का इस तरह दोस्ताना अंदाज में अलग होना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।
स्टार परिवार में जन्म, लेकिन बचपन में मां की कमी महसूस हुई
सैफ अली खान का बचपन फिल्म और क्रिकेट की दुनिया से जुड़े परिवार में बीता। उनके पिता मंसूर अली खान पटौदी भारतीय क्रिकेट के चर्चित नाम रहे, जबकि मां शर्मिला टैगोर हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं।
हालांकि, सैफ के बचपन के शुरुआती वर्षों में शर्मिला टैगोर अपने फिल्मी करियर में काफी व्यस्त थीं। वह एक दिन में दो शिफ्ट तक काम करती थीं।
दो शिफ्ट में काम करती थीं शर्मिला टैगोर
शर्मिला टैगोर के काम का शेड्यूल काफी व्यस्त रहता था। एक शिफ्ट सुबह करीब 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक चलती थी।
ऐसे में सैफ को मां का ज्यादा समय नहीं मिल पाता था। हालांकि, उनकी परवरिश में पिता मंसूर अली खान पटौदी और आसपास के लोगों ने सहयोग किया।
सुनीता गोस्वामी बनीं सैफ की ‘दूसरी मां’
सैफ के बचपन में सुनीता गोस्वामी नाम की महिला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मां शर्मिला के शूटिंग में व्यस्त रहने के दौरान सुनीता ने सैफ की देखभाल की और उन्हें मां जैसा स्नेह दिया।
यही वजह है कि सैफ के बचपन की यादों में सुनीता गोस्वामी का नाम खास तौर पर जुड़ा हुआ है।









