- याचिका में फांसी को क्रूर और अमानवीय बताते हुए वैकल्पिक तरीकों की मांग
- जहरीले इंजेक्शन और गोली मारने समेत चार विकल्प सुझाए गए थे
- केंद्र सरकार विशेषज्ञ समिति बनाकर वैकल्पिक तरीकों पर विचार कर सकती है
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा देने के लिए फांसी की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि फिलहाल फांसी की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित करने का कोई आधार नहीं है।
याचिका में फांसी को क्रूर, अमानवीय और पीड़ादायक बताते हुए मौत की सजा के लिए वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की मांग की गई थी।
चार वैकल्पिक तरीकों की मांग
याचिकाकर्ता ने फांसी की जगह जहरीले इंजेक्शन, गोली मारने समेत चार वैकल्पिक तरीकों से मौत की सजा देने का सुझाव दिया था। दलील दी गई थी कि इन तरीकों से दोषी को अपेक्षाकृत कम पीड़ा हो सकती है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फैसला केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने से नहीं रोकता।
केंद्र चाहे तो विशेषज्ञ समिति बना सकता है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार विशेषज्ञों की समिति बनाकर फांसी के विकल्पों और कम पीड़ादायक तरीकों की समीक्षा करा सकती है। यानी अदालत ने सरकार के स्तर पर इस विषय पर आगे अध्ययन की संभावना खुली रखी है।
2017 में दाखिल हुई थी याचिका
वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने वर्ष 2017 में यह याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि फांसी की प्रक्रिया में 40 मिनट से अधिक समय लग सकता है। इसके मुकाबले गोली मारने की प्रक्रिया में कुछ मिनट और जहरीले इंजेक्शन से मौत में करीब पांच मिनट लगने का दावा किया गया था।









