- रूस से तेल खरीद पर अमेरिका सख्त
- हाउस से 262-159 वोट से बिल पास
- भारत और चीन समेत 5 देश सूची में
- ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद बन सकता है कानून
नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका की ओर से 100% तक अतिरिक्त टैरिफ का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान वाले विधेयक को 262-159 वोट से मंजूरी दे दी है। हालांकि, अभी भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। इसे कानून बनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर जरूरी हैं।
सीनेट से भी मिल चुकी मंजूरी
इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट अगस्त में ही 86-11 वोट से मंजूरी दे चुकी है। अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पास होने के बाद यह राष्ट्रपति के पास जाएगा। ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन सकता है। इसके तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खुल जाएगा।
भारत और चीन पर नजर
अमेरिका की ओर से रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में भारत और चीन समेत कई देशों को शामिल किया गया है। इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इस सूची की समीक्षा करेंगे। इसके बाद परिस्थितियों के आधार पर संबंधित देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला किया जा सकता है।
रूस से तेल क्यों खरीदता है भारत?
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई। पश्चिमी देशों की ओर से रूसी तेल पर प्रतिबंधों के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी क्रूड अपेक्षाकृत आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हुआ। इसके बाद रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया।
बीते वर्षों में भारत का रूसी तेल आयात काफी बढ़ा है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और रूस इस आयात में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। यही वजह है कि अमेरिका की प्रस्तावित टैरिफ कार्रवाई का असर भारत के ऊर्जा कारोबार पर भी पड़ सकता है।
भारत ने क्या कहा?
अमेरिकी संसद में विधेयक पास होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर रुख स्पष्ट किया है। भारत का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। साथ ही भारत-अमेरिका संबंधों और व्यापार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी बातचीत जारी रहने की संभावना है।
टैरिफ बढ़ा तो क्या होगा?
अगर अमेरिका भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है तो अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी। दूसरी ओर, यदि भारत रूसी तेल की खरीद कम करता है तो उसे दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे तेल की कीमत, आयात लागत और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप इस विधेयक पर हस्ताक्षर करते हैं या नहीं और अगर कानून लागू होता है तो भारत पर वास्तविक टैरिफ कितना लगाया जाता है। इसलिए अभी 100% टैरिफ को भारत पर लागू फैसला नहीं, बल्कि संभावित कार्रवाई के तौर पर देखना होगा।









