दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट की कई उड़ानें प्रभावित

ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते कुछ फ्लाइटें लेट, कुछ रद्द; सैकड़ों यात्री परेशान

  • ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते कई उड़ानें प्रभावित
  • कुछ फ्लाइट्स में देरी, कुछ रद्द
  • सैकड़ों यात्रियों को हुई परेशानी
  • 15 सितंबर को दिल्ली-दुबई उड़ानों में भी घंटों देरी

नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार को ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते स्पाइसजेट की कई उड़ानें प्रभावित हुईं। कुछ उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ फ्लाइट्स रद्द भी करनी पड़ीं। इसके कारण एयरपोर्ट पर सैकड़ों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

दिल्ली एयरपोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यात्रियों से हुई असुविधा के लिए माफी मांगी। एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, ग्राउंड स्टाफ प्रभावित यात्रियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है और स्थिति से निपटने के लिए स्पाइसजेट के साथ समन्वय किया जा रहा है।

ऑपरेशनल दिक्कत की वजह स्पष्ट नहीं

फ्लाइट्स के प्रभावित होने के पीछे किस तरह की ऑपरेशनल समस्या रही, इसे लेकर स्पाइसजेट की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। यात्रियों को उड़ानों की स्थिति की जानकारी संबंधित एयरलाइन और एयरपोर्ट से लेने की सलाह दी गई है।

पहले भी घंटों लेट हुई थीं उड़ानें

स्पाइसजेट की उड़ानों में पिछले कुछ दिनों के दौरान देरी की घटनाएं सामने आती रही हैं। 15 सितंबर को दिल्ली से दुबई जाने वाली दो उड़ानों में कई घंटे की देरी हुई थी। इनमें एक फ्लाइट करीब 30 घंटे और दूसरी करीब 19 घंटे की देरी से रवाना हुई थी। इस दौरान करीब 200 यात्रियों ने एयरपोर्ट पर प्रदर्शन भी किया था।

वित्तीय और संचालन संबंधी चुनौतियां

स्पाइसजेट लंबे समय से वित्तीय और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 3 सितंबर को बताया था कि सरकार एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति को लेकर उसके साथ लगातार बातचीत कर रही है।

मंत्री के अनुसार, एयरलाइन को उड़ानों की संख्या बढ़ाने के लिए कहा गया है और स्पाइसजेट ने जल्द सुधार का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया था कि एयरलाइन ने सरकार से अतिरिक्त वित्तीय मदद नहीं मांगी है, लेकिन इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के तहत फंड जुटाने की कोशिश कर रही है।

ECLGS के जरिए फंड जुटाने की कोशिश

ECLGS के तहत सरकार बैंकों से लिए जाने वाले कर्ज पर गारंटी देती है, जिससे पात्र कंपनियों के लिए ऋण हासिल करना आसान होता है। विमानन क्षेत्र पर एटीएफ की कीमतों, एयरस्पेस बंद होने, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कमी और कम विमान इस्तेमाल जैसी परिस्थितियों से वित्तीय दबाव बढ़ने की बात सामने आती रही है।

इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने मई में भारतीय एयरलाइंस के लिए ECLGS 5.0 को मंजूरी दी थी।

समय पर उड़ान के मामले में रिकॉर्ड कमजोर

समय पर उड़ान संचालन के मामले में भी स्पाइसजेट का प्रदर्शन इस साल बड़ी एयरलाइंस की तुलना में कमजोर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जुलाई में एयरलाइन की करीब 34.5 प्रतिशत उड़ानें निर्धारित समय पर संचालित हुई थीं। लगातार उड़ानों में देरी और परिचालन संबंधी समस्याओं के बीच यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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