नई दिल्ली। भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी में एक नई शुरुआत हुई है। हैदराबाद की स्पेसटेक कंपनी TakeMe2Space का MOI-1A सैटेलाइट SpaceX के Transporter-18 मिशन के जरिए अंतरिक्ष में पहुंच गया है। कंपनी इसे भारत का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट बता रही है। इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ धरती की तस्वीरें लेकर उन्हें नीचे भेजने के बजाय अंतरिक्ष में ही डेटा का शुरुआती विश्लेषण कर सकेगा।
अंतरिक्ष में ही होगा डेटा का एनालिसिस
आमतौर पर अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट बड़ी मात्रा में तस्वीरें और दूसरे डेटा धरती पर भेजते हैं। इसके बाद ग्राउंड स्टेशन या कंप्यूटर सिस्टम पर इनका विश्लेषण किया जाता है। MOI-1A इसी प्रक्रिया को बदलने की कोशिश करता है।
सैटेलाइट में Nvidia Orin NX एज-कंप्यूटिंग प्रोसेसर लगाए गए हैं। इनकी मदद से AI मॉडल अंतरिक्ष में ही तस्वीरों और डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं। इसके बाद पूरी तस्वीर या कच्चा डेटा भेजने के बजाय जरूरत की जानकारी ही धरती पर भेजी जा सकती है।
300 GB डेटा में से सिर्फ जरूरी जानकारी भेजेगा
कंपनी के मुताबिक, अगर किसी सैटेलाइट ने करीब 300 GB डेटा इकट्ठा किया और उसमें से सिर्फ 5 GB जानकारी उपयोगी है, तो AI उस जरूरी हिस्से की पहचान कर सकता है। इससे बड़ी मात्रा में कच्चा डेटा धरती तक भेजने की जरूरत कम हो सकती है।
इससे सैटेलाइट और ग्राउंड स्टेशन के बीच डेटा ट्रांसफर पर आने वाला दबाव और खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। कंपनी का कहना है कि उसके ग्राहक सैटेलाइट पर अपने AI मॉडल भी चला सकेंगे।
बाढ़ और खेती की निगरानी में उपयोग
ऑर्बिटल कंप्यूटिंग का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। बाढ़ के दौरान सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जा सकता है कि पानी किस इलाके तक फैला है। इसी तरह खेती में फसलों की स्थिति, खनन क्षेत्रों में बदलाव और जमीन या अन्य गतिविधियों की निगरानी में भी इसका इस्तेमाल संभव है।
कंपनी के मुताबिक कृषि, खनन, सप्लाई चेन और बीमा जैसे क्षेत्रों से जुड़े ग्राहक इस तकनीक में रुचि दिखा चुके हैं।
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अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की तैयारी
TakeMe2Space का लक्ष्य आगे चलकर अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग नेटवर्क तैयार करना है। कंपनी की योजना कई सैटेलाइट को आपस में जोड़कर ऐसा नेटवर्क बनाने की है, जिसमें डेटा का विश्लेषण अंतरिक्ष में ही किया जा सके।
कंपनी अपनी वेबसाइट पर छह सैटेलाइट वाले ऑर्बिटल-कंप्यूटिंग कॉन्स्टेलेशन की योजना भी बताती है। इसका उद्देश्य धरती पर कच्चा डेटा भेजने के बजाय सीधे प्रोसेस की गई जानकारी उपलब्ध कराना है।









