अंबेडकरनगर। एआरटीओ कार्यालय में एक दिन पहले हुए हंगामे के बाद कार्यालय की कार्यप्रणाली और वहां सक्रिय निजी व्यक्तियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कार्यालय में निजी तौर पर काम करने वाले कुछ लोग सरकारी कामकाज में दखल देते हैं। इनके जरिए कथित तौर पर वसूली भी की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निजी व्यक्ति के दखल को लेकर आरोप
मामले में कार्यालय में तैनात एआरटीओ सतेंद्र कुमार यादव और निजी तौर पर काम करने वाले एक व्यक्ति श्रीवास्तव की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि श्रीवास्तव कार्यालय के कामकाज में प्रभाव रखता है और कर्मचारियों पर भी उसका दबाव रहता है। निजी व्यक्तियों की सक्रियता को लेकर पहले भी सवाल उठने के दावे किए जा रहे हैं।
कर्मचारियों के कपड़े उतरवाने का आरोप
हंगामे से जुड़े आरोपों के मुताबिक, एआरटीओ ने कर्मचारियों के कपड़े उतरवाए थे। यह भी आरोप है कि घटना महिला कर्मचारियों के सामने हुई। इसके अलावा एक ट्रक मालिक को अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान या जांच के निष्कर्ष से होनी बाकी है।
जांच की स्थिति पर भी उठे सवाल
मामले में आरोप है कि पीड़ितों पर कार्यालय के कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के नाम पर दबाव बनाया जाता है। वहीं, घटना के बाद जांच की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपों की पुष्टि नहीं की जा सकती है। मामले में एआरटीओ और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।









