वॉशिंगटन। ईरान ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वह अपना एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम किसी दूसरे देश नहीं भेजेगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका भरोसा जीतने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और ईरान की सभी शर्तें स्वीकार नहीं करता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।
अमेरिका के सामने रखीं सात शर्तें
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को ईरान का भरोसा जीतने के लिए उसकी सात शर्तें पूरी करनी होंगी। ये मांगें पिछले महीने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने से जुड़े घटनाक्रम के दौरान रखी गई थीं।
ईरान की प्रमुख मांगों में उसके बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना, तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकना शामिल है। तेहरान का कहना है कि इन मांगों पर ठोस कार्रवाई के बिना अमेरिका के साथ भरोसे की बहाली संभव नहीं है।
परमाणु कार्यक्रम पर दोनों देशों में टकराव
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई भी कह चुके हैं कि हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर के करीब पहुंच चुके एनरिच्ड यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए।
वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता में ठोस कमी करनी होगी। अमेरिका की मांग है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान की क्षमता सीमित की जाए। यह मुद्दा दोनों देशों के बीच समझौते की राह में बड़ी बाधा बना हुआ है।
क्या होता है एनरिच्ड यूरेनियम?
एनरिच्ड यूरेनियम वह यूरेनियम होता है, जिसमें यूरेनियम-235 नाम के परमाणु समस्थानिक का अनुपात बढ़ाया जाता है। इसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है। अधिक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी हो सकता है। इसी वजह से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को लेकर अमेरिका तथा अन्य देशों की चिंताएं बनी हुई हैं।









