ड्रोन हमलों से बचने के लिए मछली पकड़ने वाले जाल का सहारा

खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस चौकियों के ऊपर लगाए जा रहे जाल, 29 जुलाई के हमले में मारे गए थे 11 पुलिसकर्मी

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है। अल जजीरा के मुताबिक, प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर जाल लगाए जा रहे हैं। सुरक्षाकर्मियों का मानना है कि इससे हमलावर ड्रोन जाल में फंस सकते हैं और हमले से होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस तरीके को पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना है। उनका कहना है कि ड्रोन हमलों से निपटने के लिए केवल इस तरह के कम लागत वाले उपायों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता।

आतंकियों ने बदला हमले का तरीका

पुलिस के मुताबिक, इलाके में सुरक्षा बलों पर हमलों का तरीका बदल रहा है। गोलीबारी और मोर्टार हमलों के अलावा अब ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में पुलिस चौकियों और अन्य संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में हंगू जिले की पुलिस ने कम लागत वाला जाल लगाने का तरीका अपनाया है। चौकियों की छत और चारदीवारी के बीच ऊंचाई पर जाल लगाए गए हैं, जिससे ऊपर से देखने पर यह एक तरह की जालीदार छत जैसा नजर आता है।

29 जुलाई को हुआ था घातक ड्रोन हमला

खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में 29 जुलाई को पुलिस चौकी पर बम से लदे ड्रोन से हमला किया गया था। इस हमले में 11 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। हमले के बाद कई घंटे तक सुरक्षा बलों और हमलावरों के बीच मुठभेड़ चली, जिसमें 15 हमलावर भी मारे गए।

इस घटना के बाद इलाके में पुलिस और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई। ड्रोन के इस्तेमाल ने सुरक्षा बलों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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हंगू में इस साल 16 से ज्यादा हमले

पुलिस के अनुसार, इस साल हंगू जिले में कम से कम 16 हमले हो चुके हैं। लगातार हो रही हिंसक घटनाओं के कारण हंगू को खैबर पख्तूनख्वा के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जा रहा है।

ऐसे हालात में पुलिस कम लागत वाले सुरक्षा उपायों के साथ चौकियों की सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश कर रही है। मछली पकड़ने वाले जाल इसी रणनीति का हिस्सा हैं।

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