आईफोन मैन्युफैक्चरिंग पर अश्विनी वैष्णव का जवाब, बोले- ‘Cope Harder!’

PLI स्कीम के तहत ₹19,000 करोड़ के इंसेंटिव के बदले ₹25,000 करोड़ का डायरेक्ट टैक्स और ₹3 लाख करोड़ का जीएसटी मिलने का दावा

नई दिल्ली। भारत में आईफोन मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकारी आंकड़े साझा कर योजना का बचाव किया है। ब्लूमबर्ग की एक वीडियो रिपोर्ट में भारत में आईफोन असेंबलिंग और कंपनियों को दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी पर सवाल उठाए गए थे। इसके जवाब में वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आंकड़े साझा किए और आलोचकों पर तंज कसते हुए लिखा, “Cope Harder!”

₹19 हजार करोड़ के इंसेंटिव के बदले टैक्स मिलने का दावा

अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव के तहत सरकार ने ₹19,000 करोड़ दिए हैं। इसके बदले ₹25,000 करोड़ का प्रत्यक्ष कर और ₹3 लाख करोड़ का जीएसटी प्राप्त हुआ है। इन आंकड़ों के जरिए मंत्री ने यह बताने की कोशिश की कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली योजनाओं से सरकार को राजस्व भी मिल रहा है।

हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह देखना जरूरी है कि टैक्स संग्रह किस अवधि का है और इसमें किन कंपनियों या गतिविधियों को शामिल किया गया है। केवल इन आंकड़ों के आधार पर योजना के कुल आर्थिक लाभ का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 25 लाख रोजगार का दावा

वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार सृजन को भी योजना की उपलब्धियों में शामिल किया। उनके साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है। इनमें से लगभग 12 लाख लोग मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं।

सरकार की नीतियों का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है। मोबाइल फोन निर्माण में भारत की बढ़ती भूमिका को इसी रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में क्या सवाल उठाए गए?

ब्लूमबर्ग की वीडियो रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन देने के लिए करदाताओं का पैसा खर्च कर रही है, जबकि आईफोन के कई महंगे और महत्वपूर्ण कंपोनेंट अब भी विदेश से आयात किए जाते हैं।

यह बहस भारत में केवल मोबाइल फोन की असेंबलिंग बढ़ने और उसके प्रमुख पुर्जों के घरेलू स्तर पर निर्माण के बीच अंतर को लेकर है। किसी उत्पाद की असेंबलिंग देश में होने से यह जरूरी नहीं कि उसके सभी प्रमुख कंपोनेंट भी वहीं बन रहे हों।

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