सूरज की मौत में हत्या साबित नहीं कर सका अभियोजन, दो आरोपी बरी

चश्मदीद गवाह ने कोर्ट में हमले की बात से किया इन्कार, मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्य भी आरोपियों के खिलाफ नहीं हुए साबित

अंबेडकरनगर। सम्मनपुर के जहानियापुर गांव निवासी सूरज उपाध्याय की मौत के मामले में अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप साबित नहीं कर सका। सत्र न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर सम्मनपुर निवासी अरबाज और शादाब को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार ने दोनों आरोपियों की रिहाई का आदेश भी दिया। यह आदेश इस शर्त के साथ दिया गया कि वे किसी अन्य मामले में वांछित न हों।

मरी माई स्थान के पास मिला था शव

दो मई 2026 को सूरज का शव जहानियापुर-मछलीगांव क्षेत्र में मरी माई स्थान के पास मिला था। उसके भाई शिवम उपाध्याय की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने प्रेम प्रसंग समेत कई बिंदुओं पर छानबीन की। बाद में अरबाज और शादाब को मामले में आरोपी बनाया गया।

जिसे बताया चश्मदीद, उसी ने कोर्ट में बदला बयान

अभियोजन ने अफरीन को घटना का चश्मदीद गवाह बताया था। दावा किया गया कि उसने दोनों आरोपियों को सूरज पर हमला करते देखा था। हालांकि, अदालत में गवाही के दौरान अफरीन ने घटनास्थल पर मौजूद होने और मारपीट देखने से इन्कार कर दिया। इससे अभियोजन की ओर से पेश की गई प्रत्यक्षदर्शी गवाही की पुष्टि नहीं हो सकी।

मेडिकल रिपोर्ट में भी नहीं मिला हत्या का आधार

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सूरज की पीठ और कंधे पर चोटें दर्ज थीं। हालांकि, चिकित्सकों ने इन चोटों को मौत का कारण नहीं माना। अदालत में चिकित्सक ने मौत की वजह हार्ट अटैक बताई। विसरा जांच में भी जहर की पुष्टि नहीं हुई। ऐसे में मेडिकल साक्ष्य से हत्या का आरोप साबित नहीं हो सका।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button