
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मशहूर कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार शाम को 88 साल की उम्र में निधन हो गया। एक महीने पहले ही उन्हें भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
विनोद शुक्ल पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज रायपुर एम्स में चल रहा था। ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजते समय महाप्रबंधक आर. एन. तिवारी ने उन्हें वाग्देवी की प्रतिमा और पुरस्कार का चेक सौंपा था। वे छत्तीसगढ़ के पहले साहित्यकार हैं जिन्हें यह सम्मान मिला।
पुरस्कार समारोह के दौरान विनोद कुमार शुक्ल ने कहा था, “जब हिन्दी सहित तमाम भाषाओं पर संकट की बात कही जा रही है, मुझे उम्मीद है कि नई पीढ़ी हर भाषा और हर विचारधारा का सम्मान करेगी। किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में उनसे मुलाकात की थी। पीएम छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस पर रायपुर आए थे। इस दौरान विनोद कुमार शुक्ल ने प्रधानमंत्री से कहा था, “लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा है। मैं जल्द से जल्द घर लौटना चाहता हूं और लिखना जारी रखना चाहता हूं।”
साहित्य जगत ने विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।









