- परस कटुई में खेतों का निरीक्षण, किसानों को पानी-बचत और कम लागत वाली आधुनिक खेती के बताए फायदे
अम्बेडकरनगर। धान की खेती में लागत कम करने और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने ग्राम पंचायत परस कटुई स्थित आत्मा फार्म स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (SMAE) योजना के तहत डीएसआर (Direct Seeded Rice) यानी धान की सीधी बुवाई विधि से तैयार फसल का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने खेत में अपनाई जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों को देखा और किसानों से बातचीत कर डीएसआर विधि से जुड़े उनके अनुभवों की जानकारी ली। इस दौरान उप निदेशक कृषि अश्विनी सिंह भी मौजूद रहे।
खेत पर ही किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण
आत्मा फार्म स्कूल में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रामजीत और कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को डीएसआर तकनीक की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को धान की सीधी बुवाई की प्रक्रिया, उन्नत बीजों के चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण और कृषि निवेशों के सही उपयोग के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि डीएसआर तकनीक में धान की पौध तैयार कर रोपाई करने के बजाय सीधे खेत में बीज बोए जाते हैं। इससे पारंपरिक खेती की तुलना में पानी, बीज और श्रम की बचत होती है।
डीएसआर से घट सकती है खेती की लागत
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि धान की सीधी बुवाई तकनीक अपनाने से खेती की लागत में कमी लाई जा सकती है। इस विधि में सिंचाई की आवश्यकता कम होती है और मजदूरी पर होने वाला खर्च भी घटता है। विशेषज्ञों के अनुसार, उचित प्रबंधन के साथ इस तकनीक से उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।









