अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और जन शिक्षण केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में विकासखंड जलालपुर के प्राथमिक विद्यालय मालीपुर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। इसमें बच्चों को खेलों के महत्व के साथ उनके अधिकार, सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
खेल से अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास
सामाजिक कार्यकर्ता राम हित ने कहा कि खेल बच्चों के शारीरिक विकास के साथ उनके व्यक्तित्व को भी मजबूत करते हैं। खेलों से अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और आत्मविश्वास का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होना भी जरूरी है। इससे वे शोषण, हिंसा और भेदभाव जैसी परिस्थितियों के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।
‘बच्चों को अधिकारों की जानकारी देना जरूरी’
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीलम वर्मा ने कहा कि विधिक जागरूकता का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना नहीं है। बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सक्षम बनाना भी इसका हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को यह पता होना चाहिए कि किसी परेशानी या अन्याय की स्थिति में वे मदद और कानूनी संरक्षण प्राप्त कर सकते हैं। विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में सहायक हैं।
खेल और शिक्षा को बताया विकास का आधार
जन शिक्षण केंद्र की सचिव पुष्पा पाल ने कहा कि खेल और शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा और खेल के साथ संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी देना जरूरी है।









