पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण पर उठी आवाज

मानवाधिकार संघर्ष प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष पी.एन. मिश्र बोले- सम्मानजनक जीवन के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी

अंबेडकरनगर। पत्रकारों की आर्थिक स्थिति, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण को लेकर मानवाधिकार संघर्ष प्रकोष्ठ के जिला उपाध्यक्ष पी.एन. मिश्र ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों का दायित्व केवल समाचार संकलन और प्रकाशन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे लोकतंत्र और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

पी.एन. मिश्र ने कहा कि पत्रकार जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं, भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को सामने लाते हैं तथा आम लोगों की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पत्रकार सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समाज अक्सर पत्रकारों को प्रभावशाली मानता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि अनेक पत्रकार अपने परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार संघर्ष करते हैं। इसके बावजूद वे अपने पेशेवर दायित्वों से पीछे नहीं हटते।

सरकार और मीडिया संस्थानों से की पहल की अपेक्षा

पी.एन. मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए पत्रकारों के लिए सम्मानजनक पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार, मीडिया संस्थानों और समाज के सभी वर्गों से पत्रकारों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

उन्होंने कहा, “पत्रकारों की आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा केवल उनके हित का विषय नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने से भी जुड़ा है। समाज की आवाज उठाने वालों को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण मिलना आवश्यक है।”

पी.एन. मिश्र ने कहा कि पत्रकारों के हितों की रक्षा और उनके लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस प्रयास समय की आवश्यकता हैं।

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