अंबेडकरनगर। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष विनय कुमार वर्मा के नेतृत्व में गुरुवार को किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन में किसानों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने कृषि, श्रमिकों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में सभी फसलों के लिए सी2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की गई।
कर्जमाफी और किसान परिवारों के लिए मुआवजे की मांग
किसानों ने किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की व्यापक कर्जमाफी की मांग रखी। किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
श्रमिकों के मुद्दे पर किसानों ने चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही 42 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तय करने और मनरेगा में सालाना 200 दिन रोजगार की गारंटी देने की मांग उठाई गई। मनरेगा मजदूरी 700 रुपये प्रतिदिन करने की मांग भी रखी गई।
बिजली, बीज और भूमि अधिग्रहण पर भी उठाई आवाज
किसान नेताओं ने विद्युत निजीकरण विधेयक-2025 और बीज विधेयक-2025 को वापस लेने की मांग की। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को भी वापस लेने की मांग ज्ञापन में की गई।
किसानों ने जबरन भूमि अधिग्रहण और कॉरपोरेट समर्थित भूमि पूलिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए भूमि अधिकार सुरक्षित करने की बात कही।









