- बॉन्डेड डॉक्टरों ने डिप्टी सीएम आवास का घेराव किया
- वेतन में असमानता के खिलाफ प्रदर्शन
- 2 सितंबर के आश्वासन का 19 दिन बाद भी इंतजार
लखनऊ। वेतन में असमानता और लंबित एरियर के भुगतान की मांग को लेकर सोमवार को बॉन्डेड डॉक्टरों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव किया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर समान वेतन लागू करने की मांग उठाई। डॉक्टरों का कहना है कि 2 सितंबर को डिप्टी सीएम ने बारिश के बीच उनसे मुलाकात कर मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन 19 दिन बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
समान डिग्री, समान सेवा फिर वेतन अलग क्यों?
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि सभी के पास MBBS की समान डिग्री है और बॉन्ड के तहत सरकारी सेवा भी करनी पड़ रही है। इसके बावजूद अलग-अलग संस्थानों में तैनात डॉक्टरों को अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है। डॉक्टरों ने इसी वेतन असमानता को खत्म कर समान भुगतान व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
CHC-PHC में 50 से 55 हजार, मेडिकल कॉलेजों में 1.10 लाख तक
डॉक्टरों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बॉन्डेड डॉक्टरों को करीब 50 से 55 हजार रुपये महीने का मानदेय मिल रहा है। वहीं सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में बॉन्ड सेवा कर रहे डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये तक भुगतान किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि काम और योग्यता में समानता के बावजूद वेतन में यह अंतर उचित नहीं है।
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दो साल की सेवा या 10 लाख के बॉन्ड की शर्त
बॉन्ड सेवा के तहत डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में दो साल की अनिवार्य सेवा करनी होती है। सेवा पूरी नहीं करने की स्थिति में 10 लाख रुपये के बॉन्ड की शर्त बताई गई है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने कहा कि जब उनसे समान शर्तों के तहत सरकारी सेवा ली जा रही है तो मानदेय में भी समानता होनी चाहिए।









