धर्मेंद्र प्रधान बोले- Gen-Z हमारे बच्चे हैं

इस्तीफे पर पहली बार बोले पूर्व शिक्षा मंत्री, कहा- PM मोदी से बात के बाद छोड़ा पद

देश के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार अपने इस्तीफे को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जेन-जी हमारे ही बच्चे हैं और कुछ लोगों ने उन्हें भटकाने की कोशिश की। प्रधान के मुताबिक, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने के बाद ही शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।

शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश के युवाओं के संकल्प और आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां छोटी हैं। इसलिए उनके लिए पद जरूरी नहीं था।

कार्यक्रम के दौरान बीजू जनता दल (BJD) के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के 35 दिन बाद प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

नारेबाजी पर बोले- मैं किसान का बेटा हूं

BJD कार्यकर्ताओं की नारेबाजी पर प्रधान ने कहा कि वह इससे परेशान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और अगर उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा, तब भी वह वापस आएंगे।

उन्होंने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। प्रधान ने कहा कि उन्होंने ओडिशा के 4.5 करोड़ लोगों का सिर कभी शर्म से नहीं झुकने दिया और जब तक जीवित हैं, लोगों के भरोसे को नहीं तोड़ेंगे।

प्रधान के भाषण की 6 बड़ी बातें

  • जेन-जी की जिद से उन्हें परेशानी नहीं हुई। नई पीढ़ी का विरोध करने के बजाय उसे समझना जरूरी है।
  • भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 साल में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं और उनके अपने सपने हैं।
  • युवाओं की नई पीढ़ी भारत को विश्व गुरु बनाने में योगदान देगी।
  • इतिहास में युवाओं ने बदलाव का नेतृत्व किया है और बलिदान भी दिया है।
  • उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर प्रदर्शनकारियों की मांगों को मानने की मंजूरी मांगी थी।
  • PM की सहमति और युवाओं से बातचीत के बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।

मोदी सरकार में अब तक 4 पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्र में अब तक चार पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री रहे हैं। इनमें स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान शामिल हैं। प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

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