नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट और इससे जुड़े नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा। यह याचिका डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने दाखिल की है। एसोसिएशन ने कानून के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
पत्रकारिता को छूट नहीं मिलने पर उठाए सवाल
DNPA का कहना है कि कानून में पत्रकारिता के लिए पर्याप्त छूट नहीं होने से खोजी पत्रकारिता और खबरों की रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है। एसोसिएशन ने आशंका जताई कि इससे पत्रकारों के गोपनीय सूत्रों की पहचान सुरक्षित रखने में भी मुश्किलें आ सकती हैं।
निजी जानकारी के इस्तेमाल पर सहमति की शर्त का विरोध
याचिका में डिजिटल डेटा कानून के तहत निजी जानकारी के इस्तेमाल के लिए सहमति की शर्त पर सवाल उठाए गए हैं। न्यूज पब्लिशर्स के मुताबिक, समाचार जुटाने और प्रकाशित करने के दौरान इस प्रावधान के अनुपालन से पत्रकारिता के काम में बाधाएं पैदा हो सकती हैं।
RTI कानून में बदलाव और सरकारी शक्तियों पर सवाल
एसोसिएशन ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून में किए गए बदलावों और सरकार को जानकारी मांगने के लिए दी गई शक्तियों को भी चुनौती दी है। याचिका में इन प्रावधानों के असर और उनकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
17 नवंबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। इस दौरान DPDP एक्ट और उससे जुड़े नियमों को लेकर उठाए गए सवालों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।









