
- 55 रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी
- 9.80 लाख करोड़ की खरीद योजना
- लंबी जंग की तैयारी पर जोर
- स्वदेशी हथियारों की बढ़ी मांग
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा खरीद और सैन्य तैयारी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पिछले 14 महीनों में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 55 रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 9.80 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। इन योजनाओं का उद्देश्य सेना को लंबी और बहुस्तरीय युद्ध स्थितियों के लिए तैयार करना है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक युद्ध लंबे समय तक चल सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हथियारों की उपलब्धता, मरम्मत क्षमता और सैन्य रसद को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि पनडुब्बियों और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की परियोजनाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस, आकाश और अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय हथियारों की मांग भी बढ़ी है। कई देशों के साथ हजारों करोड़ रुपए के रक्षा सौदे हो चुके हैं और भारत का रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।









