वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक नए सुरक्षा समझौते की घोषणा की। प्रस्तावित समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का रास्ता साफ होगा। साथ ही रूस, चीन और अन्य गैर-नाटो देशों को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा बनाने या रणनीतिक सैन्य मौजूदगी स्थापित करने से रोका जाएगा।
ग्रीनलैंड की संप्रभुता बरकरार रहेगी
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने स्पष्ट किया है कि समझौते से ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता प्रभावित नहीं होगी। ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क के अधीन एक स्वशासित क्षेत्र है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि प्रस्तावित समझौता ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को भी मान्यता देता है।
आजाद होने पर भी लागू रहने की बात
समझौते की एक अहम शर्त यह बताई गई है कि इसके सुरक्षा प्रावधान ग्रीनलैंड के भविष्य में डेनमार्क से स्वतंत्र होने की स्थिति में भी जारी रहेंगे। अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य गतिविधियों, बेस के इस्तेमाल और ओवरफ्लाइट से जुड़े स्थायी अधिकार मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, समझौते का पूरा आधिकारिक पाठ अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अगले सप्ताह होगा औपचारिक हस्ताक्षर
अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारें अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रही हैं। इसके बाद इसे प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संसदीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। डेनमार्क की सरकार ने भी कहा है कि समझौते को लागू करने से पहले संबंधित संसदीय मंजूरियां जरूरी होंगी।
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ेगी अमेरिकी भूमिका
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति आर्कटिक क्षेत्र में इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। अमेरिका पहले से ही वहां सैन्य मौजूदगी रखता है। नए समझौते से अमेरिकी सेना की मौजूदगी और सुरक्षा गतिविधियों को और विस्तार मिलने की संभावना है। वहीं, रूस और चीन जैसे देशों की सैन्य या रणनीतिक गतिविधियों को सीमित करने का प्रावधान भी समझौते का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।









