- 45 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण का शुभारंभ, जामदानी बुनाई से रोजगार और उद्यमिता को मिलेगी नई दिशा
अंबेडकरनगर। हस्तकरघा उद्योग की पारंपरिक पहचान को नई तकनीक और कौशल से जोड़ने की दिशा में टांडा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण पहल की गई। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हैंडलूम) के अंतर्गत बुनकर सेवा केंद्र, वाराणसी द्वारा समर्थ योजना के तहत 45 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने किया। प्रशिक्षण में 30 बुनकरों को आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक बुनाई का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
हुनर को मिलेगा प्रशिक्षण, रोजगार की राह होगी आसान
कार्यक्रम का उद्देश्य बुनकरों और युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ना है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हैंडलूम क्षेत्र की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और कार्यकुशलता में वृद्धि हो सके।
प्रशिक्षण के साथ आर्थिक सहयोग भी
समर्थ योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को ₹300 प्रतिदिन की दर से प्रशिक्षण भत्ता भी दिया जाएगा। इससे प्रशिक्षण अवधि में प्रतिभागियों को आर्थिक सहयोग मिलेगा और अधिक से अधिक बुनकर इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।
जामदानी बुनाई से आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश
प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने कहा कि टांडा की जामदानी बुनाई देशभर में अपनी अलग पहचान रखती है। प्रशिक्षण के बाद बुनकर अपने कौशल को निखारकर स्वरोजगार स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना समेत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बिना ब्याज ऋण लेकर अपना उद्यम शुरू या विस्तारित किया जा सकता है, जिससे स्थानीय हस्तकरघा उद्योग को भी नई मजबूती मिलेगी।









