उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश की जेलों को लेकर सामने आई एक RTI रिपोर्ट ने जेल प्रशासन और बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान प्रदेश की अलग-अलग जेलों में 438 कैदियों और बंदियों की मौत हुई, जबकि 19 बंदियों ने जेल के अंदर आत्महत्या कर ली।
RTI में हुआ बड़ा खुलासा
यह जानकारी मेरठ के छात्र नेता विनीत चपराना द्वारा दायर RTI के जवाब में सामने आई है। उन्होंने 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जेलों में हुई मौतों, आत्महत्याओं और बंदियों की संख्या से जुड़ी जानकारी मांगी थी।
रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की जेलों में निर्धारित क्षमता से कहीं ज्यादा कैदियों को रखा गया है। उत्तर प्रदेश की जेलों में कुल 78,008 बंदियों को रखने की व्यवस्था है, जिसमें 70,556 पुरुष, 4,039 महिला और 3,413 अल्पवयस्कों की क्षमता शामिल है।
क्षमता से अधिक बंदी
इसके विपरीत वर्तमान में प्रदेश की जेलों में कुल 80,326 दोषसिद्ध और विचाराधीन बंदी मौजूद हैं। इससे साफ है कि जेलें अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक बोझ झेल रही हैं।
महिला बंदियों के साथ बच्चे भी जेल में
RTI में यह भी सामने आया कि प्रदेशभर की जेलों में 944 दोषसिद्ध महिला कैदी और 2,124 विचाराधीन महिला बंदी हैं। इनके साथ कुल 261 बच्चे भी जेलों में रह रहे हैं, जिन्हें अपनी माताओं के साथ जेल में रहना पड़ रहा है।
मौत और आत्महत्या के मामले
प्राप्त जानकारी के अनुसार 2025 के दौरान जेलों में 419 बंदियों की मौत बीमारी, आपसी विवाद और अन्य कारणों से हुई। वहीं 19 बंदियों ने जेल के भीतर आत्महत्या कर ली। इन आंकड़ों ने जेलों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।









