- शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बताया संवैधानिक अधिकार
- पुलिस कार्रवाई की होगी स्वतंत्र SIT जांच
- नाबालिग प्रदर्शनकारियों की रिहाई के निर्देश
- CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
SIT करेगी जांच
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता दिखाई देती है। कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया।
नाबालिगों की रिहाई के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 18 वर्ष से कम आयु के उन प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश
अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज और वायरलेस संचार के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। साथ ही प्रदर्शनकारियों के डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक नहीं करने का आदेश भी दिया।
कई राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल और केरल समेत कई राज्यों से इस मामले में जवाब तलब किया है।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस दौरान 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस पर अदालत ने कहा कि स्वतंत्र जांच से पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सकेगी।









