जहांगीरगंज। आयुष्मान भारत योजना के कथित दुरुपयोग और फर्जी क्लेम की शिकायत अब जांच के दायरे में है। शिकायत के तीसरे दिन भी पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। पुलिस ने आरोपी बताए जा रहे अमिनुद्दीन को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया।
उधर, स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने पर जोर रहेगा कि आयुष्मान कार्ड से जिन उपचारों के नाम पर क्लेम किए गए, उनमें संबंधित लाभार्थियों का वास्तव में इलाज हुआ था या नहीं।
एक-एक लाभार्थी से पूछे जाएंगे सवाल
जांच टीम संबंधित लाभार्थियों से सीधे संपर्क कर उनका सत्यापन करेगी। उनसे अस्पताल में भर्ती होने, उपचार और इलाज की अवधि के बारे में जानकारी ली जाएगी।
इसके बाद लाभार्थियों के बयान का अस्पताल में उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। इससे क्लेम और वास्तविक उपचार के बीच स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
अस्पताल की फाइल और क्लेम रिकॉर्ड होंगे आमने-सामने
जांच में अस्पताल के भर्ती रजिस्टर, डिस्चार्ज दस्तावेज, उपचार से जुड़े कागजात, जांच रिपोर्ट और बिल-वाउचर की पड़ताल की जाएगी। इन रिकॉर्ड का आयुष्मान योजना के पोर्टल पर दर्ज क्लेम से मिलान किया जाएगा।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित लाभार्थी के नाम पर कितना क्लेम दर्ज हुआ और उसके समर्थन में अस्पताल के पास क्या रिकॉर्ड उपलब्ध है।
मामूली रकम देकर अस्पताल ले जाने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ आयुष्मान कार्ड धारकों को मामूली रकम देने का लालच देकर निजी अस्पताल ले जाया जाता था। इसके बाद उनके कार्ड से उपचार के नाम पर हजारों रुपये के क्लेम किए जाने की आशंका जताई गई है।









