- 2020 की गलवान झड़प के बाद पहली बार भारत आए चीन के राष्ट्रपति
- पालम एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने किया स्वागत
- BRICS समिट में मोदी, पुतिन और जिनपिंग करीब 10 साल बाद एक साथ नजर आएंगे
नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। पालम एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। उनके दौरे को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
आज PM मोदी से होगी द्विपक्षीय बैठक
BRICS समिट में शामिल होने के बाद शी जिनपिंग की शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली इस मुलाकात पर भारत और चीन के संबंधों के साथ ही कई अहम क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर नजर रहेगी।
करीब 10 साल बाद एक मंच पर मोदी-पुतिन-जिनपिंग
BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 10 साल बाद एक साथ नजर आएंगे। इससे पहले तीनों नेता 2016 में गोवा में हुए BRICS समिट में एक साथ शामिल हुए थे।
PM मोदी की पांच विदेशी नेताओं से मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। कार्यक्रम के मुताबिक, सुबह से लेकर शाम तक पांच महत्वपूर्ण मुलाकातें प्रस्तावित हैं।
सुबह 10 बजे अबी अहमद से मुलाकात
सुबह 10 बजे हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी की इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी।
अनवर इब्राहिम और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस से भी बैठक
सुबह 10:30 बजे पीएम मोदी मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात करेंगे। इसके बाद सुबह 11 बजे अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी।
वियतनाम के PM से 11:30 बजे मुलाकात
सुबह 11:30 बजे प्रधानमंत्री मोदी वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद शाम को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अहम द्विपक्षीय मुलाकात प्रस्तावित है।
शाम को मोदी-जिनपिंग की बैठक
कार्यक्रम के अनुसार, शाम 6 से 7 बजे के बीच भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है। गलवान झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों के संदर्भ में इस बैठक को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









