टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में नेतृत्व और कंपनी की लिस्टिंग को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। गुरुवार को करीब तीन घंटे चली बोर्ड बैठक में एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया गया। इसके साथ ही टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ने पर भी बोर्ड ने सहमति जताई। हालांकि, दोनों फैसलों को लेकर टाटा ट्रस्ट्स ने अलग रुख अपनाया है।
चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर 4-1 से वोटिंग
टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव पर चार निदेशकों ने समर्थन में वोट किया, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और नामित निदेशक नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। ट्रस्ट्स ने इस आधार पर नियुक्ति को अपने हिसाब से वैध नहीं माना है। ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के Articles of Association के तहत चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की मंजूरी जरूरी है।
दोनों ट्रस्ट नामित निदेशकों के वोट अलग-अलग
बोर्ड बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशकों का रुख अलग रहा। नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का विरोध किया, जबकि दूसरे नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि नोएल टाटा के विरोध के बावजूद प्रस्ताव को मंजूर किया जाना कंपनी के आर्टिकल्स के अनुरूप नहीं है।
चंद्रशेखरन ने पहले कहा था- तीसरा कार्यकाल नहीं लूंगा
63 वर्षीय एन. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होना है। उन्होंने 12 अगस्त 2026 को बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। इसके बाद टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी ने सितंबर की शुरुआत में उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा। बाद में चंद्रशेखरन ने पांच साल के नए कार्यकाल के लिए सहमति दी।
पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय का भी हवाला
टाटा ट्रस्ट्स ने अपनी आपत्ति के समर्थन में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ से प्राप्त कानूनी राय का भी हवाला दिया है। ट्रस्ट्स के मुताबिक यह राय उसके इस पक्ष का समर्थन करती है कि चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों की आवश्यक मंजूरी के बिना प्रस्ताव वैध नहीं माना जा सकता। टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि बैठक में यह कानूनी राय रखी गई, लेकिन बोर्ड ने इसे संज्ञान में नहीं लिया।
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टाटा संस की लिस्टिंग पर भी मतभेद
बोर्ड बैठक में टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करने की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला भी हुआ। यह मामला भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों से भी जुड़ा है। दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह टाटा संस की लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है और कंपनी के मौजूदा ढांचे को बनाए रखने के लिए लिस्टिंग के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। ट्रस्ट्स के मुताबिक मार्च 2024 में बोर्ड ने रतन टाटा के मार्गदर्शन में टाटा संस को अनलिस्टेड रखने का फैसला किया था।









