संस्थागत धन में गड़बड़ी के मामले में पूर्व प्रधानाचार्य की याचिका खारिज

सत्र न्यायालय ने सीजेएम के समन आदेश को रखा बरकरार, बैंक लेनदेन और ऑडिट रिपोर्ट को प्रथमदृष्टया महत्वपूर्ण माना

अंबेडकरनगर। बीएन इंटर कॉलेज अकबरपुर में संस्थागत धन में कथित अनियमितता और गबन के मामले में सत्र न्यायालय ने पूर्व कार्यवाहक प्रधानाचार्य विपिन कुमार सिंह को राहत नहीं दी। सत्र न्यायाधीश चंद्रोदय कुमार ने 29 सितंबर को उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। अदालत ने सीजेएम न्यायालय के नौ जून 2025 के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें विपिन कुमार सिंह को मुकदमे के लिए तलब किया गया था।

10.20 लाख की अनियमितता का आरोप

कॉलेज प्रबंधक कृष्ण कुमार टंडन की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि कार्यवाहक प्रधानाचार्य के पद पर रहते विपिन कुमार सिंह ने कॉलेज के विभिन्न खातों में मौजूद धनराशि के लेनदेन में करीब 10.20 लाख रुपये की अनियमितता और गबन किया।

मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने 28 दिसंबर 2024 को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधक ने 18 मार्च 2025 को अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अंतिम रिपोर्ट पर आपत्ति जताई।

सीजेएम ने अंतिम रिपोर्ट की खारिज

मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। साथ ही विपिन कुमार सिंह को मुकदमे के लिए तलब करने का आदेश दिया था। इसी आदेश को पूर्व कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने सत्र न्यायालय में आपराधिक पुनरीक्षण के जरिए चुनौती दी थी।

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सरकारी ऑडिट रिपोर्ट बनी अहम आधार

सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान सामने आया कि पुलिस ने सरकारी ऑडिट नहीं होने और निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि पुलिस अभिलेख में जिला ऑडिट अधिकारी, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की 19 अगस्त 2023 की निरीक्षण रिपोर्ट भी मौजूद थी।

इस रिपोर्ट में कॉलेज के वित्तीय लेनदेन और खर्चों में कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। अदालत ने इस रिपोर्ट को भी मामले की जांच के दौरान उपलब्ध महत्वपूर्ण सामग्री के तौर पर देखा।

बैंक खातों के लेनदेन पर भी नजर

ऑडिट रिपोर्ट में 18.10 लाख रुपये के बिना प्रमाणित खर्च का उल्लेख किया गया था। इसके अलावा संस्थागत धन को व्यक्तिगत खाते में स्थानांतरित करने और करीब 4.04 लाख रुपये के परियोजना धन के डायवर्जन की बात भी रिपोर्ट में सामने आई थी।

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