नई दिल्ली। ओबीसी आरक्षण में क्रीमीलेयर तय करने के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 से चयनित 958 अभ्यर्थियों का सेवा आवंटन और प्रशिक्षण प्रभावित हो गया है। इन अधिकारियों का फाउंडेशन कोर्स अगस्त के आखिरी सप्ताह में शुरू होना था, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से फैसले को लागू करने के तरीके पर स्पष्टीकरण मांगे जाने और सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने रविवार शाम जारी नोट में कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्टता चाहती है कि 11 मार्च के फैसले को किस तरह लागू किया जाए। मुख्य सवाल यह है कि फैसले का असर केवल आगे होने वाली भर्तियों पर होगा या पहले की भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं पर भी पड़ेगा।
11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने 11 मार्च 2026 को यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन मामले में फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा कि ओबीसी उम्मीदवार की क्रीमीलेयर स्थिति तय करने के लिए केवल माता-पिता की वेतन आय को आधार बनाना पर्याप्त नहीं है। उनके पद की श्रेणी, सामाजिक स्थिति और लागू नियमों को भी ध्यान में रखना होगा।
अदालत ने सरकारी कर्मचारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) या निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों के साथ अलग-अलग व्यवहार किए जाने पर भी सवाल उठाया। फैसले में संबंधित उम्मीदवारों के मामलों पर दोबारा विचार करने और पात्र पाए जाने पर उन्हें उचित लाभ देने के निर्देश दिए गए थे।
केंद्र ने 24 अगस्त को दाखिल की याचिका
फैसले को लागू करने में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सरकार ने अनुरोध किया कि फैसले के प्रभाव और उसके लागू होने की समयसीमा को स्पष्ट किया जाए, ताकि पहले से पूरी हो चुकी नियुक्तियों और चयन प्रक्रियाओं पर पड़ने वाले असर को लेकर अनिश्चितता दूर हो सके।
केंद्र ने फैसले को लागू करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग भी की थी। 24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। 26 अक्टूबर तक इस मामले में अंतिम आदेश आने की सूचना नहीं है।
958 चयनित अभ्यर्थियों का सेवा आवंटन भी प्रभावित
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-2025 के लिए 958 अभ्यर्थियों की सिफारिश की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, क्रीमीलेयर नियमों की व्याख्या को लेकर अनिश्चितता के कारण इन अभ्यर्थियों का सेवा आवंटन और फाउंडेशन कोर्स शुरू नहीं हो पाया है।
सामान्य तौर पर नए चयनित अधिकारियों का फाउंडेशन कोर्स अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितंबर की शुरुआत में शुरू होता है। इस बार प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सका। इसका असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है, जिन्हें आईएएस सहित विभिन्न सिविल सेवाओं में नियुक्ति और प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है।
पुराने मामलों पर भी पड़ सकता है असर
इस विवाद का दायरा केवल 2025 की परीक्षा तक सीमित नहीं है। क्रीमीलेयर की स्थिति तय करने के नए मानकों से पहले की कुछ भर्तियों में आरक्षण के लिए पात्रता निर्धारित करने के तरीके पर भी सवाल उठ सकते हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि पुराने चयन और नियुक्तियों पर फैसले को किस तरह लागू किया जाए, इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं।
इसी वजह से सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का इंतजार कर रही है। अदालत का अंतिम आदेश तय करेगा कि फैसले को पुरानी चयन प्रक्रियाओं पर किस सीमा तक लागू किया जाए और संबंधित अभ्यर्थियों के मामलों में आगे क्या कार्रवाई हो।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार
ओबीसी क्रीमीलेयर से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का 11 मार्च का फैसला आरक्षण पात्रता तय करने के मानकों से संबंधित है, जबकि केंद्र की बाद की याचिका उसके क्रियान्वयन और पुराने मामलों पर प्रभाव को लेकर है। अदालत ने 24 सितंबर को फैसला सुरक्षित रखा था। जब तक स्पष्ट आदेश नहीं आता, चयनित अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।









