लखनऊ। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए कथित धर्मांतरण प्रकरण की जांच का दायरा अब आगरा और एटा मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गया है। एसटीएफ की जांच में सामने आए संपर्कों के आधार पर कई डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। इनमें मुख्य आरोपित डॉ. रमीज के करीबी बताए जा रहे डॉ. रिजवान मलिक का नाम भी शामिल है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों और डॉक्टरों के बीच किस तरह संपर्क बनाए गए और इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। एसटीएफ की रिपोर्ट में डॉ. रमीज, डॉ. रिजवान मलिक और अदनान अंसारी समेत कई लोगों के बीच संपर्कों का उल्लेख किया गया है।
100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के नेटवर्क की जांच
जांच में 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई है। आरोप है कि यह नेटवर्क जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाता था। एसटीएफ अब इस रकम के स्रोत, फंडिंग के तरीके और बैंक खातों की जांच कर रही है।
जांच का एक अहम पहलू आरोपितों के बीच आर्थिक लेन-देन और आपसी संपर्कों की कड़ियां जोड़ना है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जुटाई गई रकम कहां इस्तेमाल होती थी और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।
‘इस्लामिक मेडिकोज’ समूह की भी पड़ताल
एसटीएफ की जांच में ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम के एक समूह की जानकारी भी सामने आई है। आरोप है कि इस समूह से जुड़ी पुस्तक और पत्रिका के माध्यम से मेडिकल छात्रों के बीच संपर्क बनाए जाते थे। नए दाखिला लेने वाले छात्रों को भी समूह से जोड़ने की कोशिश किए जाने की बात कही गई है।
फिलहाल एसटीएफ इस समूह से जुड़े लोगों, उनकी गतिविधियों और मेडिकल कॉलेजों में उनके संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसी फंडिंग और संपर्कों के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।









