अंबेडकरनगर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीलम वर्मा ने बुधवार को जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर लगाया और जेल का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता और जमानत के बाद रिहाई की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि जमानत मिलने के बाद भी जमानतदार के अभाव में जेल में बंद कैदियों का ब्योरा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उपलब्ध कराया जाए।
यूटीआरसी अभियान में दो बंदियों को मिली रिहाई
शिविर में सचिव ने बताया कि विचाराधीन बंदियों की रिहाई के लिए अक्टूबर से चल रहे यूटीआरसी अभियान के तहत निर्धारित नियमों के आधार पर दो बंदियों को रिहा कराया जा चुका है। अन्य बंदियों के मामलों में कार्रवाई चल रही है। उन्होंने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 479 के दायरे में आने वाले विचाराधीन बंदियों की जानकारी समय से प्राधिकरण को भेजें, ताकि उनकी रिहाई के लिए जरूरी कार्रवाई की जा सके।
जमानत के एक सप्ताह बाद भी रिहाई न हो तो दें सूचना
निरीक्षण के दौरान सचिव ने बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुकदमों की स्थिति और निःशुल्क अधिवक्ताओं की ओर से की जा रही पैरवी के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन बंदियों की जमानत मंजूर होने के बाद भी जमानतदार न मिलने से रिहाई नहीं हो पा रही है, उनकी सूचना जमानत के एक सप्ताह बाद प्राधिकरण को भेजी जाए।
सचिव ने बंदियों को जरूरत के अनुसार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और निःशुल्क कानूनी सहायता चाहने वाले बंदियों के आवेदन समय से प्राधिकरण कार्यालय भेजने के निर्देश भी दिए।









