धागा मिल से रोजगार तक: ग्रामीण युवाओं के सपनों को मिल रही नई पहचान

पूर्व सांसद रितेश पांडेय ने कौशल प्रशिक्षण केंद्र का किया निरीक्षण, रोजगार आधारित मॉडल को सराहा

अंबेडकरनगर। टांडा-अकबरपुर मार्ग स्थित पार्थ थ्रेड प्राइवेट लिमिटेड अब केवल धागा उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। संस्थान में संचालित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई) का प्रशिक्षण केंद्र जिले के ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बन रहा है। मंगलवार को पूर्व सांसद रितेश पांडेय ने प्रशिक्षण केंद्र और उत्पादन इकाई का निरीक्षण कर प्रशिक्षण व्यवस्था तथा रोजगार से जुड़े पहलुओं की जानकारी ली।
प्रशिक्षण से रोजगार तक की पूरी प्रक्रिया देखी
निरीक्षण के दौरान पूर्व सांसद ने प्रशिक्षण ले रहे युवक-युवतियों से संवाद किया और प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अवधि तथा रोजगार की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ सीधे जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि यहां प्रशिक्षण और रोजगार को जोड़ने का प्रयास जमीनी स्तर पर दिखाई देता है।
तीन माह का निःशुल्क प्रशिक्षण, रोजगार पर विशेष जोर
प्रशिक्षण केंद्र में आर्थिक रूप से कमजोर और बीपीएल परिवारों के युवक-युवतियों को बुनाई और सिलाई का तीन माह का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रशिक्षित युवाओं को बेंगलुरु, पुणे सहित देश के विभिन्न औद्योगिक शहरों की टेक्सटाइल कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
आठ हजार से अधिक युवा ले चुके हैं प्रशिक्षण
पार्थ थ्रेड प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक अंकित कुमार पांडेय ने बताया कि संस्थान का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह रोजगार आधारित है। उन्होंने कहा कि तीन माह के प्रशिक्षण के बाद अधिकतम प्लेसमेंट सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है। अब तक करीब आठ हजार युवक-युवतियां यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या विभिन्न टेक्सटाइल कंपनियों में कार्यरत है। संस्थान का उद्देश्य युवाओं को कौशल के साथ सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है।

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