- एनएमएनएफ के तहत स्थापित होगा बीआरसी
- उद्यमियों, एफपीओ और एसएचजी से मांगे आवेदन
- प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
- स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगे जैव-आदान
अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के तहत जिले में एंटरप्राइज मॉडल पर एक बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) स्थापित किया जाएगा। इसके लिए इच्छुक उद्यमियों, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और पैक्स (पीएसीएस) से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। उप निदेशक कृषि डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने योजना की जानकारी देते हुए पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन करने की अपील की है।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगे प्राकृतिक जैव-आदान
उप निदेशक कृषि ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पशु एवं पौध आधारित प्राकृतिक जैव-आदानों की स्थानीय स्तर पर उपलब्धता जरूरी है। इसी उद्देश्य से एनएमएनएफ क्लस्टरों में बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर की स्थापना की जाएगी, ताकि किसानों को आवश्यक जैव-आदान आसानी से उपलब्ध हो सकें।
इन उद्यमियों को मिलेगी प्राथमिकता
बीआरसी के लिए वही उद्यमी, समूह या इकाई पात्र होगी, जो प्राकृतिक खेती का अभ्यास कर रही हो या जिसके सदस्यों को प्राकृतिक खेती का अनुभव हो। यदि किसी क्षेत्र में प्राकृतिक खेती करने वाला किसान उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे इच्छुक और प्रशिक्षित किसान भी आवेदन कर सकेंगे, जो आगामी फसल सत्र से प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए तैयार हों।
कच्चे संसाधन और स्थान होना जरूरी
बीआरसी संचालित करने के लिए पशुधन, पौध आधारित बायोमास और अन्य आवश्यक कच्चे संसाधनों की उपलब्धता अनिवार्य होगी। साथ ही गोबर और गोमूत्र की आपूर्ति के लिए निकटवर्ती गौशालाओं से व्यवस्था तथा जैव-आदानों के निर्माण और भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान होना आवश्यक है।









