कुर्सी और पटल के इर्द-गिर्द घूमता सिस्टम, बाबुओं की पकड़ पर उठ रहे सवाल

कलेक्ट्रेट से तहसील और ब्लॉक तक लंबे समय से जमे कर्मचारियों पर उठ रहे सवाल, कई मामलों में तैनाती एक जगह और काम दूसरी जगह किए जाने की चर्चा

  • लंबे समय से एक ही पटल पर कार्यरत कर्मचारियों को लेकर चर्चा
  • तैनाती के विपरीत कामकाज की स्थिति जांचने की जरूरत
  • सरकारी फाइलों में बाहरी लोगों की भूमिका पर सवाल

अंबेडकरनगर। जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में लंबे समय से एक ही पटल पर जमे कर्मचारियों और बाबुओं की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कलक्ट्रेट से लेकर तहसील, ब्लॉक और स्वास्थ्य विभाग तक कई कर्मचारियों के लंबे समय से एक ही तरह के काम से जुड़े रहने की चर्चा है। आरोप है कि पटल बदलने या स्थानांतरण के बाद भी कुछ कर्मचारी पुराने काम में दखल बनाए रखते हैं। इससे विभागीय व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, जिले के विभिन्न विभागों में ऐसे कर्मचारी भी हैं, जिनकी तैनाती किसी अन्य पटल या स्थान पर है, लेकिन उनका कामकाज दूसरे स्थान पर होने की बात सामने आ रही है। यदि ऐसा है तो इसकी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। इससे यह भी पता चल सकेगा कि किस कर्मचारी की आधिकारिक तैनाती कहां है और वह वास्तव में किस पटल का काम देख रहा है।

सरकारी फाइलों के रखरखाव में बाहरी लोगों की भूमिका पर सवाल

कुछ विभागों में सरकारी कार्यों और फाइलों के रखरखाव में निजी या बाहरी कर्मचारियों की भूमिका होने की भी चर्चा है। सरकारी अभिलेखों और फाइलों से जुड़े काम में यदि अनधिकृत लोगों की भूमिका है तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय है। इसकी विभागीय स्तर पर जांच होने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

एआरटीओ कार्यालय में भी उठ रहे सवाल

उप संभागीय परिवहन कार्यालय को लेकर भी निजी कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि कार्यालय में आने वाले लोगों को अपने काम के लिए निजी कर्मचारियों पर निर्भर होना पड़ता है।

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