
अम्बेडकरनगर। अकबरपुर ब्लॉक के नैली गाँव में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई अमृत सरोवर योजना बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है। तीन वर्ष पहले शुरू हुआ निर्माण कार्य आज भी आधा-अधूरा पड़ा है। लाखों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद सरोवर जंगल बनी झाड़ियों, टूटी संरचनाओं और उपेक्षा का प्रतीक बन गया है।
36 लाख की परियोजना, साढ़े चार लाख खर्च के बाद काम ठप
ग्राम नैली में मई 2022 में 50×60 मीटर क्षेत्रफल में अमृत सरोवर का निर्माण शुरू किया गया था। सूचना बोर्ड के अनुसार इस परियोजना पर 36 लाख 14 हजार रुपये स्वीकृत थे, परन्तु लगभग साढ़े चार लाख रुपये खर्च होने के बाद ही कार्य रोक दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के नाम पर सिर्फ एक अधूरा गेट खड़ा है, न पक्की सीढ़ियाँ बनीं, न लाइटिंग, न बैठने की व्यवस्था और न ही सुरक्षा से जुड़ी संरचनाएँ दिखाई देती हैं। अधूरा तालाब अब झाड़ियों और दलदल का अड्डा बन चुका है।
सरोवर के चारों ओर घना जंगल, ग्रामीणों की आवाजाही कठिन
सरोवर के चारों तरफ बबूल, पीपल, नीम, आम और घास-फूस की झाड़ियाँ इतनी तेजी से फैल गई हैं कि लोग इस क्षेत्र के पास तक नहीं जा पाते। आसपास गंदगी का ढेर लग गया है और जलभराव की स्थिति बनी रहती है। ग्रामीण बताते हैं कि तीन साल से अधिकारी क्षेत्र में झांकने तक नहीं आए।
योजना का उद्देश्य हुआ विफल, भूजल सुधार भी अटका
अमृत सरोवर योजना का मकसद था—गाँव के भूजल स्तर को मजबूत करना, जल संचयन को बढ़ावा देना और ग्रामीणों को स्वच्छ, शांत वातावरण प्रदान करना।
लेकिन विभागीय उदासीनता ने यह लक्ष्य अधूरा छोड़ दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण समय से पूरा होता तो सरोवर बारिश का पानी संचित कर भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करता।









