नई दिल्ली/ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिरम ने अपर सुबनसिरी जिले में चीनी सैनिकों के भारतीय सीमा के 40 से 50 किलोमीटर अंदर तक घुस आने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हैं। उनके मुताबिक, इससे सैनिकों की गश्त और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। हालांकि, भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे का दावा करने वाले एक वायरल वीडियो को फर्जी बताया है। सेना के अनुसार, वीडियो अक्टूबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दृश्य से छेड़छाड़ कर तैयार किया गया है।
कांग्रेस ने सीमावर्ती इलाकों में चीनी सैनिकों की गतिविधियों और स्थानीय लोगों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं, घुसपैठ से जुड़े आरोपों और सेना की ओर से वीडियो को फर्जी बताए जाने के बीच दोनों दावों के तथ्यों की अलग-अलग पुष्टि जरूरी है।
सीमावर्ती इलाकों का दौरा कर कांग्रेस ने लगाए आरोप
बोसिराम सिरम के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने 26 से 29 अगस्त तक अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व गृह मंत्री तांगा बयालिंग तथा अपर सुबनसिरी के सांसद जारोडुम क्री भी शामिल थे।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ईटानगर से नाचो होते हुए लाइमकिंग और तक्षिंग तक पहुंचा। यहां सदस्यों ने स्थानीय लोगों से बातचीत की और सीमा के आसपास की स्थिति की जानकारी ली। दौरे के बाद सिरम ने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में लोग पहले याक चराने, जंगलों से जरूरी चीजें जुटाने और शिकार के लिए जाते थे, वहां अब उनकी आवाजाही प्रभावित हो रही है। कांग्रेस ने इन शिकायतों की जांच कराने और सीमा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठाई है।
जुलाई में सैनिकों के बीच हाथापाई का भी दावा
सिरम ने स्थानीय लोगों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि जुलाई के आखिरी सप्ताह में कुछ स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई हुई थी और लाठियां भी चली थीं। उन्होंने कहा कि सीमा पर कई जगह दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं।
हालांकि, सैनिकों के बीच कथित झड़प और चीनी सैनिकों के 40 से 50 किलोमीटर अंदर आने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध कराए गए विवरण से नहीं होती। इसलिए इन आरोपों को कांग्रेस अध्यक्ष के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भारतीय सेना ने वायरल वीडियो को बताया फर्जी
अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे का दावा करने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। भारतीय सेना ने इस वीडियो को फर्जी बताते हुए कहा कि इसे अक्टूबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दृश्य से छेड़छाड़ करके बनाया गया है।
वीडियो को लेकर सेना का स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है, लेकिन वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी सैनिकों की गतिविधियों से जुड़े कांग्रेस के आरोप दो अलग-अलग मुद्दे हैं। वीडियो को फर्जी बताए जाने से घुसपैठ के सभी आरोप अपने आप प्रमाणित या खारिज नहीं हो जाते। सीमा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित दावों की अलग से जांच जरूरी है।
केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग
बोसिराम सिरम ने घुसपैठ के दावों को खारिज करने वाले मुख्यमंत्री, राज्य के गृह मंत्री और केंद्रीय रक्षा मंत्री के बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की शिकायतों को अफवाह बताकर खारिज करने के बजाय उनकी जांच की जानी चाहिए।
सिरम के मुताबिक, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात का समय मांगा था, ताकि उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति से अवगत कराया जा सके। हालांकि, उनके दावे के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात की अनुमति नहीं मिली।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि स्थानीय लोगों से मिली जानकारी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सामने आ रही शिकायतों की पड़ताल की जानी चाहिए।
मोबाइल नेटवर्क और जरूरी सामान की आपूर्ति पर भी सवाल
सिरम ने सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि संचार सुविधाएं कमजोर होने के कारण तैनात सैनिकों को अपने परिवारों से संपर्क करने में परेशानी होती है।
इसके अलावा, उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में खाने-पीने और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति में दिक्कतें होने की बात कही। कांग्रेस ने इन समस्याओं पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई है।
सीमा की स्थिति स्पष्ट होने के लिए जांच जरूरी
अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों के बाद सीमा सुरक्षा, स्थानीय लोगों की आवाजाही और सैनिकों की सुविधाओं से जुड़े सवाल उठे हैं। दूसरी ओर, भारतीय सेना ने वायरल वीडियो को फर्जी बताया है। फिलहाल, चीनी सैनिकों के 40 से 50 किलोमीटर अंदर आने और जुलाई में कथित झड़प के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने से ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।









