अंबेडकरनगर। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की लागत कम करने की दिशा में अंबेडकरनगर में नई पहल की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार के बेगूसराय जिले में संचालित हरित खाद उत्पादन एवं प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर लौटे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी ईशा प्रिया से मुलाकात कर अपने अनुभव साझा किए। बैठक में जनपद में इस मॉडल को लागू करने की संभावनाओं और रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रतिनिधिमंडल में एनआरएलएम के अधिकारी, कर्मचारी और स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधि महिलाएं शामिल थीं। टीम ने अध्ययन भ्रमण के दौरान देखी गई व्यवस्थाओं, तकनीकी प्रक्रियाओं और सामुदायिक भागीदारी के मॉडल की जानकारी प्रशासन को दी।
गोबर, बॉटम ऐश और जैविक अवयवों से तैयार हो रही गुणवत्ता वाली खाद
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि बेगूसराय में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गोबर, बॉटम ऐश और अन्य जैविक अवयवों का उपयोग कर हरित खाद तैयार की जा रही है। यह मॉडल किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है और बड़े स्तर पर उपयोग में लाया जा रहा है।
अध्ययन के दौरान टीम ने खाद निर्माण की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया। कच्चे माल के संग्रहण से लेकर मिश्रण, परिपक्वता, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, भंडारण और विपणन तक की व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन किया गया। साथ ही इस कार्य से जुड़े स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के संचालन मॉडल को भी समझा गया।
खेती की लागत घटी, मिट्टी की सेहत में आया सुधार
बैठक में साझा किए गए अनुभवों के अनुसार हरित खाद के उपयोग से मिट्टी की जैविक गुणवत्ता बेहतर हुई है। खेतों की जल धारण क्षमता बढ़ी है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी आई है। किसानों ने उत्पादन लागत घटने और फसल की गुणवत्ता में सुधार होने की जानकारी भी साझा की।









