मुंबई : Brihanmumbai Municipal Corporation के एक कथित आदेश को लेकर मुंबई में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन ने मछली बाजारों में मछली काटने और साफ करने पर रोक लगाने की बात कही है। आदेश के अनुसार विक्रेताओं को ग्राहकों को पूरी मछली बेचनी होगी, अन्यथा उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस फैसले के बाद वाकोला समेत कई इलाकों के मछली बाजारों में नाराजगी देखने को मिल रही है। खासकर कोली समुदाय ने इसे अपनी आजीविका और परंपरा पर हमला बताया है।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
Akhil Chitre ने आरोप लगाया कि मछुआरों को बाजारों से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कोली समुदाय पीढ़ियों से यही काम करता आ रहा है और वह अपना व्यवसाय बंद नहीं करेगा।
वहीं Sandeep Deshpande ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मछली काटने पर रोक लगाई जा रही है तो चिकन और मटन दुकानों पर भी समान नियम लागू होने चाहिए।
बीएमसी का कहना है कि बाजारों में मछली के अवशेषों से गंदगी और दुर्गंध फैलती है जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। हालांकि मछुआरों का आरोप है कि प्रशासन मूलभूत सुविधाएं देने में विफल रहा है और अब उनकी रोजी-रोटी पर असर डाला जा रहा है।
Ritu Tawde ने कहा कि यदि कोई अनुचित कार्रवाई हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। वहीं विपक्ष की नेता Kishori Pednekar ने कहा कि प्रशासन लोगों के खानपान और पारंपरिक व्यवसाय में दखल नहीं दे सकता।









