- इस्ट्रैक निदेशक एमआर राघवेन्द्र ने विद्यार्थियों से साझा की अंतरिक्ष उपलब्धियां
- चंद्रयान-3, आदित्य-L1 और SPADEX अभियानों पर हुई चर्चा
- अंतरिक्ष मॉडलों की प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों का ध्यान खींचा
लखनऊ। चंद्रयान-3 के लैंडर की चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से में सफल लैंडिंग भारत की वैज्ञानिक क्षमता का बड़ा प्रमाण है। जिस उपलब्धि को कभी लगभग असंभव माना जाता था, भारत ने उसे संभव कर दिखाया। यह बात इस्ट्रैक, बंगलूरू के निदेशक एमआर राघवेन्द्र ने मंगलवार को सीएमएस गोमतीनगर कैंपस में आयोजित राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस-2026 के कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता केवल देश की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता को प्रदर्शित नहीं करती, बल्कि युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि को किसी भी स्तर पर कमतर नहीं आंका जा सकता।
कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉ. प्रताप सिंह बघेल भी मौजूद रहे।
विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को भारत के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों और वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई। चंद्रयान-3, आदित्य-L1 और SPADEX जैसे महत्वपूर्ण अभियानों पर विशेष चर्चा हुई।
विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों से सीधे संवाद किया और अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान से जुड़े सवाल पूछे। वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का जवाब देते हुए उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
अंतरिक्ष मॉडलों की प्रदर्शनी
कार्यक्रम में भारत के अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े विभिन्न मॉडलों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी के जरिए विद्यार्थियों को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम, आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक और वैज्ञानिक उपलब्धियों को करीब से समझने का मौका मिला।
विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना उद्देश्य
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना और उन्हें इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में भारत की अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिक उपलब्धियों और भविष्य के अभियानों को लेकर विद्यार्थियों में खास उत्साह देखने को मिला।









