निजी अस्पतालों पर सख्ती: ‘डॉक्टर बिन बैठे सेंटर’ सिस्टम पर ब्रेक

अम्बेडकरनगर में बड़ा एक्शन, अब कागजों पर नहीं चलेगा इलाज, डॉक्टर की मौजूदगी अनिवार्य—स्वास्थ्य विभाग ने कसा शिकंजा

अम्बेडकरनगर। जिले में निजी स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा बदलाव लागू किया है। अब केवल लाइसेंस लेकर अस्पताल या अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाना आसान नहीं होगा। लाइसेंसधारक डॉक्टर की जिले में वास्तविक मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है।

नई व्यवस्था के तहत डॉक्टर को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह किस केंद्र पर किस समय मौजूद रहेगा। बिना उपस्थिति और बिना निर्धारित ड्यूटी शेड्यूल के किसी भी संस्थान का संचालन नियमों के तहत मान्य नहीं होगा।

96 अस्पताल और 40 अल्ट्रासाउंड सेंटर विभाग की निगरानी में

जिले में इस समय 96 निजी अस्पताल और 40 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई मामलों में नियमों को दरकिनार कर संचालन की शिकायतें मिली हैं। कुछ संस्थान लाइसेंस नवीनीकरण के बिना भी काम करते पाए गए।

अब सभी संस्थानों की फाइलों की दोबारा जांच शुरू की जा रही है। विभाग का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि हर सेंटर पर मानक के अनुसार चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हों।

एक जिले में दो जगह से ज्यादा पंजीयन नहीं, सिस्टम होगा ट्रैक

नए नियमों के अनुसार किसी भी चिकित्सक का एक जिले में अधिकतम दो स्थानों पर ही पंजीयन मान्य होगा। इससे अधिक पंजीयन पाए जाने पर उसे अवैध माना जाएगा।

इसके साथ ही डॉक्टरों को यह स्पष्ट रिकॉर्ड देना होगा कि वे किस समय किस केंद्र पर सेवाएं दे रहे हैं। विभागीय स्तर पर इसे ट्रैक करने की भी तैयारी है, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

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