लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को बिखरा हुआ या जातीय खेमों में बंटा हुआ नहीं, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को जाति और क्षेत्र के नाम पर बांटने वाली प्रवृत्तियां देश की एकता के लिए चुनौती हैं। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि जब राष्ट्र के सामने ऐसे संकट दिखाई दें तो उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। शिक्षकों को नई पीढ़ी के बीच ऐसे विचारों को मजबूत करना चाहिए, जो समाज और देश को जोड़ने का काम करें।
‘बिखरा और बंटा हुआ भारत’ नहीं चाहिए
सीएम योगी ने कहा कि हमें यह तय करना होगा कि हम कैसा भारत चाहते हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या ऐसा भारत चाहिए जो बिखरा हुआ हो, आपस में जातीय खेमों में लड़ता हो या फिर ऐसा भारत चाहिए जो एकजुट होकर आगे बढ़े।
उन्होंने कहा कि यदि समाज जाति और क्षेत्र के आधार पर बंटता है तो यह राष्ट्रमाता, भारत माता और अपने पूर्वजों के प्रति अपराध जैसा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाली ताकतों को सफल नहीं होने देना चाहिए।
शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के सामने किसी तरह का संकट दिखाई देने पर शिक्षकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे नई पीढ़ी के विचार, चरित्र और सामाजिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित करते हैं।
कार्यशाला में शिक्षा के माध्यम से संस्कार, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को उनकी सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना रहा।
लखनऊ में हुआ शिक्षक गरिमा कार्यक्रम
प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला का आयोजन आशियाना स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में किया गया। कार्यक्रम में अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रमुख डॉ. चिन्मय पंड्या समेत शिक्षक और संगठन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पहुंचने पर गायत्री परिवार की ओर से मुख्यमंत्री का लोटा और माला देकर स्वागत किया गया।
चिन्मय पंड्या बोले- सुविधाएं बढ़ीं, बेचैनी भी बढ़ी
अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रमुख डॉ. चिन्मय पंड्या ने अपने संबोधन में वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्वार्थ और संकीर्णता बढ़ रही है, जबकि धर्म, न्याय, नीति, मूल्य, सदाचार और निष्ठा जैसे मूल्यों के लिए संघर्ष दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति के पास धन और सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन इसके साथ तनाव, बेचैनी, दुर्विचार और असंतोष भी बढ़ा है। उनके अनुसार, केवल भौतिक सुविधाएं हासिल कर लेना व्यक्ति को भीतर से संतुष्ट नहीं कर सकता।
इच्छा पूरी करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता
डॉ. पंड्या ने कहा कि लोगों के मन में अपनी इच्छा को तुरंत और किसी भी कीमत पर पूरा करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। दूसरे को नुकसान पहुंचाकर भी अपना हित साधने की सोच समाज के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। कार्यशाला में शिक्षकों की भूमिका को इसी व्यापक सामाजिक बदलाव से जोड़कर देखा गया।
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