
अम्बेडकरनगर। सैदापुर ग्राम सभा में सार्वजनिक तालाब की जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 20 वर्षों से तालाब की भूमि पर कब्जा कायम है, जबकि इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं और न्यायालय व प्रशासनिक स्तर से आदेश भी जारी हो चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आदेशों के बाद भी स्थिति जस की तस
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अभिलेखों में तालाब दर्ज है और मामले में आदेश भी पारित हो चुके हैं, फिर भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लंबित है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
जलभराव और पर्यावरण पर असर
ग्रामीणों के अनुसार तालाब पर कब्जे के कारण बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। जल संरक्षण और निकासी व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि तालाब का अस्तित्व धीरे-धीरे खतरे में पड़ता जा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पूरे मामले में संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग स्तर पर पुराने अभिलेखों की जांच और फाइलों का परीक्षण जारी है।
कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। क्षेत्र में चर्चा है कि जहां अन्य जिलों में सरकारी जमीनों पर तेजी से कार्रवाई होती है, वहीं सैदापुर में मामला लंबे समय से अटका हुआ है। अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।









