- पुलिस पर अवैध हिरासत और धमकाने का आरोप
- परिवार को परेशान करने का भी लगाया आरोप
- कानून के मुताबिक जांच कराने की मांग
- 24 जुलाई की घटना का याचिका में जिक्र
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर प्रदर्शन में छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने वाले वालंटियर जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पुलिस पर अवैध हिरासत, धमकाने और परिवार को परेशान करने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हिरासत में रखने का आरोप
याचिका के अनुसार, 24 जुलाई की आधी रात को जुनैद मलिक एंटी-रेबीज का इंजेक्शन लगवाकर आरएमएल अस्पताल से लौट रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रास्ते से हिरासत में ले लिया। उनका आरोप है कि करीब छह घंटे तक उन्हें रोके रखा गया, मोबाइल फोन जबरन अनलॉक कर उसकी जांच की गई और फंडिंग व भोजन व्यवस्था से जुड़े सवाल पूछे गए।
सुनसान जगह छोड़ने का दावा
याचिका में कहा गया है कि पूछताछ के बाद पुलिस उन्हें देहरादून रोड पर एक सुनसान स्थान पर छोड़कर चली गई। इसके बाद उन्होंने कैब के जरिए दिल्ली लौटने का दावा किया है।
परिवार को परेशान करने का आरोप
जुनैद मलिक ने आरोप लगाया कि गाजियाबाद पुलिस ने उनके पिता को हिरासत में लिया और उनके घर पर छापेमारी की। याचिका के अनुसार, पुलिस मेरठ स्थित उनकी विवाहित बहन के ससुराल भी पहुंची और वहां से उनके ससुर व देवर को भी पूछताछ के लिए साथ ले गई। बाद में सभी को छोड़ दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि उनके परिवार के खिलाफ किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। साथ ही, यदि कोई जांच हो तो वह पूरी तरह कानून के दायरे में और निष्पक्ष तरीके से कराई जाए।









