कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी राजनीतिक टूट सामने आई है। विधानसभा के 80 में से 58 विधायकों के अलग गुट बनाने के बाद अब लोकसभा के 20 सांसदों के बगावत करने की खबर सामने आई है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, बागी सांसदों ने 18 मई को लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर अलग गुट को मान्यता देने की मांग की थी।
बागी सांसदों में यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी और देव (दीपक अधिकारी) जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कुल 20 सांसदों ने अलग गुट का समर्थन किया है।
इससे पहले 3 जून को 58 विधायकों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपने गुट को मान्यता देने की मांग की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने उनके गुट को मान्यता भी दे दी थी। विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक विधायक बागी गुट के साथ होने के कारण दल-बदल कानून के तहत उनकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
दल-बदल कानून की 10वीं अनुसूची के अनुसार किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद यदि अलग गुट बनाते हैं या किसी अन्य दल में विलय का फैसला लेते हैं, तो उन्हें कानूनी मान्यता मिल सकती है। अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति द्वारा लिया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में 2022 में हुई शिवसेना की बगावत से कर रहे हैं, जहां एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया था। बाद में चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को मान्यता दी थी।









