नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी मानकों का ड्राफ्ट जारी किया है। प्रस्तावित नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने हैं।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य कारों की ईंधन दक्षता यानी माइलेज बढ़ाना और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। नए नियम लागू होने के बाद एथेनॉल, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में कमी आने की संभावना है, जबकि ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती हैं।
EV और हाइब्रिड कारों पर मिलेगा सुपर क्रेडिट
नई नीति के तहत सरकार कंपनियों को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की बिक्री पर ‘सुपर क्रेडिट’ देने का प्रस्ताव कर रही है। इसका मतलब है कि कंपनियों के लक्ष्य में इन वाहनों की बिक्री को सामान्य कारों से ज्यादा वजन दिया जाएगा।
प्रस्ताव के मुताबिक, एक इलेक्ट्रिक कार की बिक्री को कागजों पर 3 कारों के बराबर गिना जाएगा। वहीं, एक हाइब्रिड कार को 1.6 कारों के बराबर माना जाएगा।
इस व्यवस्था से वाहन कंपनियों के लिए औसत ईंधन खपत और प्रदूषण से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करना आसान हो सकता है। ऐसे में कंपनियां EV और हाइब्रिड कारों की बिक्री बढ़ाने के लिए आकर्षक कीमत या ऑफर पेश कर सकती हैं।









