ओपनएआई ने दावा किया है कि उसकी नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक ने गणित की बेहद कठिन समस्याओं में शामिल नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम को हल कर लिया है। कंपनी के मुताबिक, AI को इस समस्या का समाधान खोजने में सिर्फ 88 घंटे लगे।
नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम गणित और भौतिक विज्ञान से जुड़ी एक जटिल समस्या है। इसका संबंध तरल पदार्थों के बहाव को समझने और उसके व्यवहार का गणितीय तरीके से अनुमान लगाने से है।
2000 में चुनी गई थीं 7 मिलेनियम प्रॉब्लम्स
क्ले मैथमेटिक्स इंस्टीट्यूट ने साल 2000 में गणित की सात बेहद कठिन और लंबे समय से अनसुलझी समस्याओं की सूची जारी की थी। इनमें शामिल कई सवाल एक सदी से भी ज्यादा पुराने थे।
इन समस्याओं को ‘मिलेनियम प्रॉब्लम्स’ कहा गया। इनमें से किसी एक समस्या का सही समाधान पेश करने वाले गणितज्ञ के लिए 10 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की गई थी।
पहले सिर्फ एक समस्या का मिला था समाधान
OpenAI के इस दावे से पहले सात मिलेनियम प्रॉब्लम्स में से सिर्फ एक को हल किया जा सका था। रूसी गणितज्ञ ग्रिगोरी पेरेलमैन ने 2003 में पॉइनकेयर कंजेक्चर को हल किया था।
अगर OpenAI का दावा गणितीय जांच में सही साबित होता है, तो मिलेनियम प्रॉब्लम्स में हल होने वाली समस्याओं की संख्या दो हो जाएगी।
आखिर नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम क्या है?
इसे आसान उदाहरण से समझें। अगर फर्श पर एक गिलास पानी गिर जाए तो पानी अलग-अलग दिशाओं में फैलने लगता है। वैज्ञानिक गणितीय समीकरणों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि पानी किस दिशा में बहेगा, उसकी गति कितनी होगी और उसका बहाव किस तरह बदलेगा।
तरल पदार्थों के इस बहाव को समझने के लिए नेवियर-स्टोक्स इक्वेशन का इस्तेमाल किया जाता है।
असली सवाल यहीं से शुरू होता है
वैज्ञानिकों के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या नेवियर-स्टोक्स समीकरण हर परिस्थिति में तरल पदार्थ के बहाव का सही हिसाब दे सकते हैं?
या फिर ऐसी कोई स्थिति संभव है, जहां इन समीकरणों के आधार पर गणना काम करना बंद कर दे और समाधान में गंभीर समस्या पैदा हो जाए?
यही सवाल नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम को गणित की सबसे चर्चित और कठिन समस्याओं में शामिल बनाता है।









