अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। बुधवार यानी 9 सितंबर को एशियाई और यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.25% बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
24 जुलाई के बाद यह पहली बार है जब ब्रेंट क्रूड इस स्तर पर पहुंचा है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में इसी तरह तेजी जारी रहती है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकर नष्ट किए
तेल की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच नई सैन्य झड़पों को माना जा रहा है। यूएस सेंट्रल कमांड ने मंगलवार देर रात जारी बयान में बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट किया है।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल से किए गए हमले के जवाब में की गई।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बढ़ी चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की एक बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ा खतरा है। करीब 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण इस रूट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके चलते तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
दुनिया के तेल कारोबार के लिए बेहद अहम रूट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम कारोबार का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश भी अपने निर्यात के लिए इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं।
भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रूट पर काफी निर्भर है। भारत अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी मार्ग से आयात करता है। ईरान भी अपने तेल निर्यात के लिए इसी समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करता है।









