नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विज्ञान भवन में आयोजित ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। दो दिवसीय इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने NGT का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। सम्मेलन में 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों के साथ पर्यावरण विशेषज्ञ, न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
भारत के प्रति व्यक्ति उत्सर्जन पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी तय करते समय देशों की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन अभी भी वैश्विक औसत के आधे से कम है। मोदी ने यह भी कहा कि विकसित देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत की तुलना में कई गुना अधिक है।
पेरिस समझौते के लक्ष्यों का किया जिक्र
मोदी ने 2015 के पेरिस COP-21 सम्मेलन में भारत की ओर से तय किए गए पर्यावरणीय लक्ष्यों का भी उल्लेख किया। उस समय भारत ने 2030 तक 2005 के स्तर की तुलना में GDP की उत्सर्जन तीव्रता 33-35 प्रतिशत घटाने, बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक पहुंचाने और अतिरिक्त वन एवं वृक्ष आवरण के जरिए 2.5 से 3 अरब टन CO₂ के बराबर कार्बन सिंक तैयार करने का लक्ष्य रखा था।
भारत ने बाद में 2022 में अपने NDC लक्ष्यों को और बढ़ाया। सरकार के अनुसार उत्सर्जन तीव्रता में कमी का लक्ष्य 45 प्रतिशत और गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य 50 प्रतिशत किया गया।
2015 के दो लक्ष्य समय से पहले हासिल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत ने 2015 के शुरुआती NDC के उत्सर्जन तीव्रता और गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता से जुड़े लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल कर लिया था। 2026 में सरकार ने बताया कि उत्सर्जन तीव्रता में 33-35 प्रतिशत की कमी का लक्ष्य 11 साल पहले ही हासिल हो गया था और गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता का 40 प्रतिशत लक्ष्य भी नौ साल पहले पूरा हो चुका था।
सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने देश में स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक परिवहन के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 12 साल पहले भारत की सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 2 गीगावाट थी, जो अब 160 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में भी तेजी से हुई वृद्धि का जिक्र किया।
कई अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख
मोदी ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी भारत की विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया। इनमें इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, मिशन LiFE और ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ जैसी पहल शामिल हैं। उन्होंने स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में हाइड्रोजन ट्रेन का भी जिक्र किया।
क्या है COP-21 और पेरिस समझौता?
पेरिस COP-21 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन के तहत आयोजित 21वां सम्मेलन था। यह 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2015 तक फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुआ था। सम्मेलन में पेरिस समझौता अपनाया गया, जिसका उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखने और उसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाना था।









