नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने सरकार से मामले पर जवाब मांगा, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा की कार्यवाही 3 मिनट में स्थगित
सत्र शुरू होते ही विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर सरकार को घेरा। लगातार नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही महज तीन मिनट चल सकी और इसे दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
राज्यसभा में खड़गे ने उठाए सवाल
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था और ट्रस्ट को 70 एकड़ से अधिक जमीन सौंपी गई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मंदिर से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल रहे हैं, इसलिए इस मामले में सरकार को जवाब देना चाहिए।
जांच एजेंसियों पर भी उठाए सवाल
खड़गे ने कहा कि ट्रस्ट पर नकदी, चढ़ावा, गहनों और जमीन से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने सवाल किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही हैं।
किरेन रिजिजू का पलटवार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी वर्षों तक भगवान राम और राम मंदिर का विरोध करती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के समय भी विपक्ष ने विरोध किया था और अब वही दल इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।
सत्ता-विपक्ष में तीखी नोकझोंक
रिजिजू ने कहा कि विपक्ष देश को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भगवान राम के प्रति अपने पुराने रुख पर देश से माफी मांगनी चाहिए, उसके बाद सरकार से जवाब मांगना चाहिए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और नारेबाजी होती रही।









